अमरुद (ग्वायवा)

Guava

अमरुद (ग्वायवा)

उत्पति- वैज्ञानिको का विचार है कि अमरूद की उत्पति अमरीका के उश्ण कटिबधी य भाग तथा वेस्टडंडीज से हुई है।

वानस्पतिक नाम- सीडीयम ग्वायवा

परिचय- भारत की जलवायु में अमरूद इतना घुल मिल गया है कि इसकी खेती यहां अत्यन्त सफलता पूर्वक की जाती है पता चलता है कि 18 वीं षाताब्दी में यह भारत वर्ष में लाया गया अधिक सहिश्ण होने के कारण इसकी सफल खेती अनेक प्रकार की मिट्टी तथा जलवायु में की जा सकती है।

विटामिन- यह स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभदायक फल है इसमें विटामिन सी अधिक मात्रा में पाया जाता है इसके अतिरिक विटामिन ए तथा बी भी पाया जाते है इसमंे लोहा, चुना तथा फास्फोरस अच्छी मात्रा में होते है।

जलवायु- अमरूद के लिए गर्म तथा षुश्क जलवायु सबसे अधिक उपयुक्त है यह गर्मी तथा पाला दोनो रहने करता है।

किस्में- वी एन आर इलाहाबादी, सफेदा, लाल, गूदेवाला, चितिदार, करेला, बेदाना तथा अमरूद सेब है।

समय- 30 वर्ष तक फल देता है।

एक हेकड़ में- 1600 पौधे लगाए जाते है। कतार से कतार 2 मीटर दूरी और पौधे से पौधे 1 मीटर दूरी रखता है।

गुण व उपयोग- सर्दियों में अमरूद खाने से दंत रोगो के लिए अमरूद रामबाण साबित होता है अमरूद के पतों को चबाने से दांतो के कीड़ा और दांतो से सम्बंधित रोग भी दूर हो जाते है।

आय- प्रत्येक पेड़ 500 से 600 फल देता है। प्रथम वर्ष 15 से 20 किलों एक पौधा देता है तो 1600 गुण 20 बराबर 32 किवटल गुण 4500 बराबर 144000 रू.